Saturday, 4 February 2017

Manimahesh Kailash Yatra- Part 2 -Pathankot-Chamba- Bharmour-Hadsar

मणि महेश कैलाश यात्रा-2

मणि महेश कैलाश यात्रा-2 ( पठानकोट-चम्बा-भरमौर–हडसर )

पठानकोट से चम्बा की दुरी लगभग 125  किलोमीटर है। लगभग पूरा रास्ता पहाड़ी है । बस में 160  रुपये की टिकेट लगी । टिकेट के पीछे दुरी 130  किलोमीटर लिखी थी । शायद बस का रूट कुछ अलग हो ,बाइपास वगैरह से । बस  धार कलां , भात्वान और बनीखेत होते हुए गयी । बनीखेत से ही दायें  तरफ डलहौजी की सडक कटती है । यहाँ से डलहौजी मात्र 8 किलोमीटर की दुरी पर है जबकि चम्बा 45 किलोमीटर दूर है । यहाँ तक खूब बारिश मिली, मौसम भी एकदम सुहावना बना हुआ था लेकिन मेरे लिए बस का सफ़र आरामदायक नहीं रहा , पुरे रास्ते खाली पेट होने से  और नींद के कारण परेशान रहा । पहाड़ी रास्ता होने के कारण जी अलग मिचलाने लगा । बैग में परांठे पैक किये हुए रखे थे लेकिन खाने की बिलकुल भी इच्छा नहीं थी । मालूम था अगर कुछ  भी खा लिया तो तुरंत मुंह से ही वापिस निकालना पड़ेगा । रास्ते में एक जगह चाय नाश्ते के लिए बस रुकी । यहाँ मैंने नीबूं सोडा ही लिया , इसके बाद मेरी तबियत में हल्का सा सुधार आया ।

हडसर से दिखता हिमालय 


 चार घंटे की थकाऊ यात्रा के बाद आख़िरकार दोपहर करीब साढ़े बारह के करीब बस चम्बा पहुंची । चम्बा बस अड्डे से पहले ही बस कंडक्टर ने घोषणा कर दी की यही बस आगे  भरमौर जाएगी और जिन्होंने मणिमहेश जाना है वो इसी बस में बैठे रहे । वैसे  मेरी पहले ये इच्छा थी की थोड़ी देर चम्बा में रूककर , कुछ खा पीकर फिर भरमौर की बस लेता लेकिन सुबह के अनुभव को देखते हुए वो विचार त्याग दिया । चम्बा आकर बस लगभग आधी खाली हो गयी। मैं जल्दी से एक दुकान से एक लिम्का और निम्बू ले आया ताकि आगे का बस का सफ़र भी ठीक से कट जाये ।

 10  मिनट रुकने के बाद बस भरमौर की ओर चल दी। चम्बा से भरमौर की दुरी 65 किलोमीटर है, यहाँ 90 रुपये की टिकेट लगी। पूरा रास्ता पहाड़ी और खतरनाक है और लगभग सारा सिंगल लेन भी । पठानकोट से चम्बा तक तो काफी अच्छी सड़क बनी है लेकिन चम्बा से भरमौर जाने वाली सड़क की हालत काफी ख़राब थी। रास्ते की भयावकता को देखकर आँखों से  नींद तो गायब ही हो गयी । लगभग पुरे रास्ते सड़क के बायीं तरफ गहरी खाई मे नदी बह रही थी । सिंगल लेन होने के कारण बस की गति भी कम ही थी । इस 65 किलोमीटर की दुरी तय करने में तीन घन्टे से ज्यादा लग गए और बस साढ़े चार बजे भरमौर पहुंची, यहाँ का बस स्टैंड हडसर की तरफ है यानि की पूरा भरमौर क्रॉस करने के बाद । भरमौर में प्रवेश करते ही भयंकर जाम मिला ,थोड़ी देर तक तो बस में ही बैठे रहे लेकिन फिर धीरे -2 सवारियां उतर कर पैदल ही चलने लगी । मैं भी नीचे उतर गया एक दुकान से पूछा की हडसर जाना है किस तरफ जाऊं तो उसने बताया कि जो सड़क नीचे की तरफ जा रही है उस पर जाओ और आखिर में सड़क के ऊपर ही हडसर जाने वाली बस खडी होंगी । मैं वहाँ से पैदल ही हडसर की तरफ़ चल पड़ा ।

 पूरे रास्ते में बुरी तरह जाम था ,लगता था सभी लोग अपना काम धाम छोड़ कर यहीं आ गए हैं ।गाड़ियों की बड़ी लम्बी लाइन और उस पर उनके हॉर्न की कर्ण भेदी आवाजें । गाड़ियों के बीच से निकलता हुआ लगभग एक किलोमीटर चलने के बाद मैं बस स्टैंड पहुँच गया । यहाँ से हडसर की दुरी 13 किलोमीटर है । यहाँ से सामने हडसर दिखता भी है लेकिन पहाड़ी रास्ता होने के कारण दूर पड़ता है । हडसर जाने के लिए एक बस खड़ी थी 8 -10 लोग पहले से उसमे बैठे थे , मैं भी उसमे बैठ गया । जब काफ़ी देर तक बस नहीं चली तो ड्राईवर से पूछा की बस का चलने का टाइम क्या है तो उसने बताया की कोई टाइम नहीं है जब भर जाएगी तो चलेंगे , ऐसा तो मैंने प्राइवेट जीपों में देखा था सरकारी बस में पहली बार ऐसा देखा। कोई और चारा न देख, बस भरने का इंतजार करने लगा । तभी एक पिक-अप वैन जो हडसर की तरफ जा रही थी वहाँ आकर रुक गयी । एक लड़के ने उससे बात की और फिर बस में बैठे अपने साथियों को बुला लिया और बस में से लड़के भागकर उस पर सवार हो गए, मैंने भी देर नहीं की। वैन में सामान के बावजूद काफ़ी लोग उस पर सवार हो गए और थोड़ी ही देर में सब से 20-20 रुपये देकर हडसर पहुँच गए । 

अब तक शाम के 6:30 बज चुके थे और दिन ढल आया था। मैंने घर से चलने से पहले जो प्रोग्राम बनाया था उसके अनुसार मैं आराम से 2-3 बजे तक हडसर पहुँचता और सीधा धणछो के लिए निकल जाता ।हडसर से धणछो 6 किलोमीटर की दुरी पर है और चढ़ाई भी ज्यादा कठिन नहीं है । धणछो में ठहरने के लिए काफी जगह मिल जाती हैं । अगले दिन सुबह धणछो से मणिमहेश जाता जो वहाँ से 8 किलोमीटर दूर हैं और वहाँ से दर्शन के बाद शाम तक वापिस हडसर पहुँच जाता । इसमें ज्यादा भागदौड़ भी नहीं थी। समान्यत ऐसा हो भी जाता क्योंकि पठानकोट से हडसर की दुरी लगभग 200 किलोमीटर है । 7-8  घंटे में यहाँ पहुँच जाना चाहिए था ।लेकिन जैसा आदमी सोचता है हमेशा वैसा होता नहीं ।पहले बस न मिलने से फिर भयंकर जाम मिलने से हडसर पहुँचने में 12 घंटे से भी ज्यादा समय लग गया ।

अब तक मेरी हालत बहुत ख़राब हो चुकी थी सबह का भूखा प्यासा और नींद का मारा । मुझे सड़क पर चलते हुए भी चक्कर आ रहे थे। मुझे ठहरने के लिए जगह की तलाश थी । कहीं कोई रूम मिले और जाकर सो जाऊं लेकिन हडसर में ठहरने के लिए बहुत सिमित जगह हैं। कही रूम मिल ही नहीं रहा था । लंगर वालों से पता किया तो जबाब मिला की रात 9 बजे के बाद बता  पायेंगे । काफ़ी खोजबीन के बाद एक रूम मिला । नीचे दुकाने थी और ऊपर दो तीन मंजिला घर । सीडियाँ चढ़कर ऊपर गया तो सामने एक 18  -19  वर्ष की दिखने वाली सुन्दर लड़की दिखी ।

मैंने कहा रात रुकने के लिए रूम चाहिए।
वो  बोली हाँ ,मिल जायेगा , कितने लोग हो ?
मैंने कहा..  अकेला ।
लड़की थोडा मुस्कराई और थोड़ी हैरानी से बोली अकेले ही आये हो ?
मैंने सर हिलाया । क्यूँ अकेले आना मना तो नहीं है ?
नहीं । कहाँ से आये हो ?
अम्बाला से। रूम के लिए किससे बात करनी पड़ेगी ?
बोली.. मैं हूँ न । मुझसे ।
मैंने भी पूछ लिया तुम यहाँ अकेले मैनेज करते हो ?
बोली नहीं सब हैं । सास, ससुर, देवर, देवरानी ।
मैं आश्चर्य से मन ही मन बुदबदाया सास, ससुर ???? देवर, देवरानी भी ।
चलो ठीक है। रूम दिखाओ और रेंट बताओ ।

एक कमरा दिखाया। पुराना सा सीलन वाला कमरा , लकड़ी की छत। शायद काफ़ी समय से बंद था और किराया 200 रुपये । साथ में शर्त भी की कोई और आ गया तो शेयर करना पड़ेगा । नहीं तो तीन सौ  किराया । सारी शर्तें मंजूर की और कोई रास्ता भी नहीं था । लड़की बड़ी व्यवहार कुशल थी । बातचीत में कोई संकोच नहीं। मैंने उनसे पूछा की मुझे सुबह जल्दी निकलना है लेकिन मैं अपना सामान यहीं छोड़कर जाऊँगा तो जबाब मिला की आप कल रात तो वापिस आ नहीं पाओगे सामान हमारे पास रख देना उसका कोई किराया नहीं । मैंने थोड़ी उनसे मणिमहेश की जानकारी ली । उस लड़की ने बताया कि 14 किलोमीटर की लगातार चढाई है कहीं भी समतल या उतराई नहीं मिलेगी। उसका पति वहीँ मणिमहेश झील पर पुजारी है । 

 कमरे से बाहर आँगन में ही शौचालय और स्नानघर था । मेरा तो दिन ही अब शुरू हुआ था अभी तक सबह का ब्रश भी नहीं किया था । सारे काम निपटाए और नहा-धोकर ट्रैकिंग के लिए पूरी तरह तैयार हो गया । अब खाना खाने की बारी थी । नीचे सड़क पर कई लंगर लगे हुए थे लेकिन वहाँ जाने की हिम्मत नहीं हुई । बैग में से घर से लाये हुए परांठे निकाले .लाया तो इन्हें नाश्ते के लिए था लेकिन सुबह नाश्ता न कर सका .इन्ही ठन्डे परांठो को आचार के साथ खाकर भूख शांत की और सोने के लिए लेट गया। अभी झपकी लगने ही वाली थी कि  तभी दरवाजे पर दस्तक हुई । वोही घर की छोटी मालकिन थी । दरवाजा खोला । वो बोली, तीन लोग और आयें हैं। यह रूम उनको दे दो। आप मेरे साथ ऊपर चलो वहां एक दूसरा कमरा है आप वहां सो जाना । आदेश मान्य हुआ । जिस कमरे में अब गया वो पहले के मुकाबले साइज़ में आधा भी नहीं था मुश्किल से 8 फिट गुना 7 फ़ीट का , लेकिन एकदम साफ़ सुथरा। एक सिंगल बेड लगा था और नरम नरम बिस्तर । दिल खुश हो गया । मैंने घर की छोटी मालकिन से पूछ लिया अब यह रूम तो फाइनल है न ? अब मैं चेंज नहीं करने वाला और हाँ ,मैं सुबह जल्दी निकल जाऊँगा और मेरा बाकी सामान यहीं रहेगा, आप संभाल लेना। । मुस्कराते हुए जबाब मिला , ठीक है और ये रूम आपका फाइनल है, जो आपका फ़ालतू सामान होगा उसे यहीं छोड़ देना ,हम संभाल लेंगे । अब आप आराम से सो जाओ

आज बहुत थक गया था । नींद के कारण अजीब सा फील हो रहा था । सोने से पहले भोले नाथ से धमकी वाले अंदाज में प्रार्थना की भोले नाथ आज की सारी थकान और परेशानी नींद के साथ ही मिटा देना अगर सुबह भी यही हाल रहा तो यहीं से वापिस लौट जाऊँगा । ऐसा कहकर सुबह पांच बजे का अलार्म लगा कर गहरी नींद में सो गया ।

अगली पोस्ट जल्दी ही तब तक आप हडसर व मणिमहेश ट्रेक की कुछ फोटो देखें ।

धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय ।
माली सींचे सौ घड़ा, ॠतु आए फल होय ॥


     

















64 comments:

  1. बहुत बढ़िया, सहगल साहब

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  2. धन्यवाद ओम भाई जी .

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  3. बढ़िया सहगल साहब मैंने भी अकेले यात्रा की बहुत लेकिन मुझे कभी कोई नही मिला ऐसा

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    1. धन्यवाद विनोद भाई . किसी का मिलना न मिलना इत्तफाक की बात है .

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  4. सबसे बढ़िया लगा "अकेले मैनेज करते हो, नहीं सब हैं ना सास ससुर, देवर देवरानी"। इतने सारे लोग मैनेज करते होंगे क्या। फोटो के लिए निशब्द हूँ।

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    1. धन्यवाद हर्षिता जी .

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  5. छुपे छुपे से रहते हैं सरे आम नहीं हुआ करते..
    कुछ रिश्ते बस एहसास होते हैं उनके नाम नहीं हुआ करते nice post with beautiful pictures.

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    1. धन्यवाद .
      दिल का बुरा नहीं बिलकुल ,
      बस
      लफ्जों में थोड़ी शरारत लिये फिरता हूँ . :)

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  6. This comment has been removed by the author.

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  7. लाजवाब यात्रा वर्णन हमेशा की तरह और तस्वीरें तो मनमोहक हैं ही।

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    1. धन्यवाद मुकेश जी . ब्लॉग पर आतें रहें .

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  8. जैसा कि मुझे आशा थी कि चंबा के लिए सीट मिलने के साथ ही आपकी दुश्वारियाँ कम होती चली जाएंगी, स्थितियाँ उस तरफ बढ़ ही रही है। अंत होते होते एक सीलन भरे कमरे से आरामदायक कमरे में जगह मिल पाना उसी अच्छी शुरुआत की अगली कड़ी है। दोनों पोस्ट्स अपने अंत में एक बेहतर संभावना के साथ समाप्त हो रही है, यह आपकी साकारत्मकता को प्रदर्शित करता है।

    आपकी धमकी का अंदाज़ जबरदस्त है और एक भोला ही अपने भोले पर इतना अधिकार रख सकता है 🙏

    फ़ोटोज़ मनमोहक हैं।

    शेयर के लिए धन्यवाद 💐

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    1. धन्यवाद अवतार जी . अब भोले पर विश्वाश करना है तो पूरा ही करेंगे .किश्तों में क्या करना . जैसे छोटे बच्चे मन बाप को कई बार निस्वार्थ धमका लेते है , मेरी धमकी भी कुछ वैसी ही थी .

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  9. बहुत बढ़िया.लाजवाब यात्रा वर्णन और शानदार तस्वीरें .

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    1. धन्यवाद अजय जी .

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  10. बढ़िया संस्मरण,बढ़ते चलो।

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    1. धन्यवाद ललित जी .स्नेह बनाये रखें .

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    1. धन्यवाद सैनी साहेब .

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  12. अरे सहगल साब , होटल का नाम पर्सनल में बता देना मुझे ! :) खैर यात्रा अच्छी और जानकारी भरा वृतांत चल रहा है ! तसवीरें शानदार हैं ! सारे काम निपटाए और नहा-धोकर ट्रैकिंग के लिए पूरी तरह तैयार हो गया । अब खाना खाने की बारी थी । नीचे जाकर कहीं खाने की हिम्मत नहीं हुई । घर से लाये हुए परांठे निकाले और आचार के साथ खाकर सोने के लिए लेट गया। यहां तारतम्य सही नहीं बैठ रहा ? दोबारा पढ़िए एक बार

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    1. योगी जी होटल नहीं , होम स्टे था . आपकी सलाह पर वाक्य में परिवर्तन कर दिया है .आशा है अब तारतम्य सही बैठ रहा है .

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    2. धन्यवाद आपका

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  13. भोला से पहले भोली से मुलाकात !
    बढ़िया यात्रा संस्मरण लिखा सहगल साहब , मगर जल्दी ही ख़त्म हो गया । योगी जी की बात पर भी ध्यान दीजिए । फोटो तो हमेशा की तरह शानदार रही ।

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    1. धन्यवाद मुकेश जी . अगले दिन का संस्मरण शुरू होने से पहले यहीं ब्रेक देना उचित लगा . योगी जी की सलाह माँ ली गयी गयी है .

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  14. पहाड़ी सदैव ऐसे ही मुस्कुरा के मिलते है :)👍 शानदार लेख, संभव हो तो मणिमहेश माहात्म्य पर भी एक पेज लिखे ज्ञानवर्धन के लिए

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    1. धन्यवाद मिश्रा जी . अगले भाग में मणिमहेश माहात्म्य पर लिखने की कोशिश रहेगी .

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    1. धन्यवाद रमेश जी.

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  16. यात्रा की शुरुआत थोड़ी परेशानी वाली थी , पर भोले बाबा जो करता है अच्छा ही करता है ।पढ़ने में मजा आ रहा है ।

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    1. धन्यवाद किशन जी . आपकी बात से सहमत

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  17. badhiya shuruat hai... jaldi trek ki foto lagao.
    chhoti malkin ki foto nahi li ?

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    1. धन्यवाद तिवारी जी .अगले भाग में ट्रेक की तस्वीरें खूब मिलेंगी .. और फोटो कैसे लेता ..शरीफ बच्चा हूँ .

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  18. बहुत ही बढ़िया यात्रा विवरण

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    1. धन्यवाद तारकेश्वर गिरी जी .

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  19. bahut hi achcha vivaran hai sirji... kaya aap ne jo rout apanaya us ke alava koi or rout nahi? jo delhi se sidha ja sako?

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    1. धन्यवाद किशोर जी.

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    1. धन्यवाद जोगी जी.

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  21. nice post and beautiful pic. thanks for sharing

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    1. धन्यवाद सचिन जी.

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    1. धन्यवाद अनिल जी.जय भोलेनाथ .

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  23. बहुत अछि शुरुआत और दूसरा दिन बहुत अच्छा...फोटो देख कर बहुत अच्छा लगा...भोले के लिए आपका प्यार ही आपकी सकारात्मकता की और अग्रसर कर रहा है

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    1. धन्यवाद प्रतीक जी .

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  24. बहुत अछि शुरुआत और दूसरा दिन बहुत अच्छा...फोटो देख कर बहुत अच्छा लगा...भोले के लिए आपका प्यार ही आपकी सकारात्मकता की और अग्रसर कर रहा है

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  25. पुनः सीलन भरे कमरे कमरे से साफसुथरे कमरे का मिलना आप पर भोलेनाथ की कृपा को इंगित करता है....
    जय हो भोले की ...

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    1. धन्यवाद त्यागी जी . जय भोले की .

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  26. चित्र बहुत ही मनमोहक है । यात्रा और ठहरने का इतंजाम मे दिमाग दौड़ाना पड़ा । बहुत ही जानकारी सहित लेख है । अगले भाग के प्रतिक्षा मे है ।

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    1. धन्यवाद कपिल जी . जय भोले की .अगला भाग भी लिख दिया है .

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  27. 2012 में जाट देवता के साथ गया था सहगल जी

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    1. धन्यवाद राजेश जी . जय भोले की .

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  28. जानकारी ,रोचकता व मनमोहक चित्रों से सम्माहित एक शानदार लेख.

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    1. धन्यवाद राज जी . जय भोले की .

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  29. अति सुन्दर चित्र और उनसे भी सुन्दर वर्णन।

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    1. धन्यवाद सुशांत जी .स्नेह बनाये रखें .

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  30. जय भोले की नरेश जी....

    आपकी मणिमहेश यात्रा का ये भाग बहुत अच्छा लगा... अच्छा हुआ की आपको हडसर कमरा मिल गया चाहे कैसा भी हो...जब थकान होती है तो यही पांच सितारा जैसा आराम देता है...

    लेख अच्छा लगा और चित्र तो हमेशा की तरह शानदार

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    1. धन्यवाद रीतेश जी . आपकी बात से बिलकुल सहमत .जय भोले की

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  31. Bahut badhiya Naresh Ji, yaatra sahi ja rahi hai...Maja aa raha hai padhkar

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  32. kya baat hai naresh ji, manimahesh yatra ki yaaden taaja karwa di aap ne

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  33. kya baat hai naresh ji, manimahesh yatra ki yaaden taaja karwa di aap ne

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  34. मन में ठान लिया तो सब सुगम हो जाता है। पर भोला भी इतना भोला नहीं है कि हर किसी को आराम से बुला ले ,प्रयास करने वालो को कभी खाली हाथ नहीं भेजता भोले, शानदार और दमदार यात्रा ...हम भी साथ है भोला की कृपा से 🤓

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    1. धन्यवाद बुआ जी ।जब तक ईश्वर का बुलावा न हो किसी भी तीर्थ यात्रा पर जाना संभव नहीं है ।

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