Tuesday, 18 April 2017

BIKE TRIP: Chopta-Tungnath-Deoria Tal :Part 5

चोपता, तुंगनाथ, देवरिया ताल यात्रा- 5

यात्रा तिथि -04/05 अक्टूबर 2015

पिछली पोस्ट में आपने पढ़ा की हम लोग सुबह 9 बजे देवरिया ताल के लिये चले थे और लगभग दोपहर 12:30 बजे सारी गाँव वापिस आ गए । सारी गाँव पहुंचकर हमने अपनी अपनी बाइक उठाई, सामान लिया और उखीमठ की तरह चल दिए । मस्तुरा गाँव के पास एक दुकान पर रुककर चाय पी। चोपता जाते हुए भी इसी दुकान पर रुके थे। थोड़ा ब्रेक लेने के बाद फिर से उखीमठ की तरफ हमारी बाइक भागने लगी । सारा रास्ता तीखी ढलान वाला है तो बिना स्टार्ट करे ही बाइक सरपट भाग रही थी । उखीमठ से आगे कुंड तक ऐसे ही चला ।वहां आकर उतराई ख़तम हो जाती है और लगभग प्लेन रास्ता आ जाता है । कुंड से थोड़ा पहले ही बाइक फ़िर से स्टार्ट कर ली।

रुद्रप्रयाग -अलकनंदा तथा मंदाकिनी नदियों का संगमस्थल

Friday, 7 April 2017

BIKE TRIP: Chopta-Tungnath-Deoria Tal :Part 4 (Deoria Tal )

चोपता, तुंगनाथ, देवरिया ताल यात्रा-4 ( देवरिया ताल )
यात्रा तिथि -04 अक्टूबर 2015

अगली सुबह जल्दी ही मेरी आँख खुल गयी । समय देखा अभी 6 भी नहीं बजे थे । मैं जब भी घर से बाहर होता हूँ मेरी नींद हमेशा जल्दी खुल जाती है । साथी अभी सो रहा था और मैं उठकर बाहर आ गया । बाहर अभी हल्का अँधेरा था, थोड़ी देर कमरे के बाहर टहलता रहा । बाहर काफी ठण्ड थी । अन्दर कमरे में आया और जैकेट पहन कर ऊपर सड़क पर आ गया । अभी ढाबे भी बंद थे ,थोड़ी दूर सड़क पर टहलने निकल गया । कई खूबसूरत नज़ारे देखने को मिले । मोनाल (उत्तराखंड का राजकीय पक्षी ) और कई अन्य दुसरे खूबसूरत पक्षी आसपास  दिखे, पर अफ़सोस मेरे पास न कैमरा था न फ़ोन । कोई फोटो न खींच पाया ।

Saturday, 1 April 2017

BIKE TRIP -Chopta Tungnath -Deoria Tal- 3rd Part (Tungnath )


चोपता, तुंगनाथ, देवरिया ताल यात्रा-3 (चोपता तुंगनाथ –चोपता )
यात्रा तिथि -03 अक्टूबर 2015

चोपता पंहुच कर एक ढाबे वाले से कमरा पता किया । ढाबे के नीचे की तरफ 2 कमरे बने थे और अभी दोनों खाली थे । एक कमरा हमने 400 रूपये में ले लिया । ढाबे वाले ने बताया कि कल यहाँ बहुत भीड़ थी और रहने के लिए जगह कम पड़ गयी थी और किराया भी डबल था । खैर हम अपना सामान कमरे में रखकर बिना देर किये तुंगनाथ की और चल दिए । हमें चंद्रशिला भी जाना था तो इसलिए फ़िलहाल आराम करने का विचार त्याग दिया ।

सुन्दर बुग्याल

Thursday, 23 March 2017

BIKE TRIP- Chopta,Tungnath and Deoria Tal- 2nd Part

चोपता, तुंगनाथ, देवरिया ताल यात्रा-2 (देवप्रयाग से चोपता )
यात्रा तिथि -03 अक्टूबर 2015 

देवप्रयाग में जिस गेस्ट हाउस में हम ठहरे थे वो संगम के ठीक ऊपर काफी ऊंचाई पर बना हुआ है । रात को तो अँधेरा हो जाने के कारण हम यहाँ से संगम देख नहीं पाए थे। । सुबह उठकर जब बाहर निकल कर देखा वहीँ से संगम दिख रहा था। अलकनंदा और भागीरथी ,दोनों नदियों काफी शोर करते हुए बह रही थी । मंद मंद बहती शीतल हवा के बीच आसपास का नज़ारा बेहद हसीं लग रहा था ।

Friday, 17 March 2017

BIKE TRIP of Chopta-Tungnath-Devria Tal- Part 1

चोपता, तुंगनाथ, देवरिया ताल यात्रा-1

यात्रा तिथि -02 अक्टूबर 2015  से 05 अक्टूबर 2015 

      काफी समय से मेरी तुंगनाथ और देवरिया ताल जाने की इच्छा थी । वर्ष 2011 में जब केदारनाथ जी और बद्रीनाथ जी की यात्रा पर गया था तो केदारनाथ से बद्रीनाथ जाने के लिये, उखीमठ चोपता होते हुए गोपेश्वर -चमोली जाने वाली सड़क से होकर ही गया था ।तब से इस जगह की ख़ूबसूरती दिलो दिमाग में छाई हुई थी । उस समय मुझे तुंगनाथ के बारे में मालूम नहीं था लेकिन जगह की ख़ूबसूरती से इतने प्रभावित हुए थे कि उखीमठ से चमोली के 70 किलोमीटर के रास्ते में ही हम तीन- चार जगह पर रुके  थे । जब बाद में मालूम हुआ कि तुंगनाथ -देवरिया ताल भी इधर ही हैं तभी से यहाँ फ़िर से जाने की इच्छा मन में बनी हुई थी ।

देवप्रयाग

Wednesday, 1 March 2017

Manimahesh Yatra : Significance and Important Information of Yatra


 मणि महेश कैलाश यात्रा-1
मणि महेश कैलाश यात्रा-6 ( मणिमहेश महात्म्य कथा एवम अन्य जानकारी )

मणिमहेश पौराणिक महत्व :
देवभूमि  हिमाचल  का चंबा जिला शिवभूमि के नाम से विख्यात है। इस जिले में मणिमहेश़ ऐसा तीर्थ स्थल है जिसकी सदियों से जन-जन में मान्यता रही है। जम्मू के डोडा, भद्रवाह किश्तवाड़  क्षेत्रों  के लोग तो सैंकड़ो  मीलों का यह सफर नंगे पैर तय कर पवित्र झील में डुबकी लगाकर अपना जीवन धन्य मानते है । हिमाचल प्रदेश मे चम्बा जिले के भरमौर के एक पर्वत शिखर पर ब्रह्माणी देवी का तत्कालीन मंदिर है और यह मंदिर बुद्धिल घाटी में स्थित है। चम्बा जिले मे ही स्थित मणिमहेश- कैलाश भी बुद्धिल घाटी का ही एक भाग है। मणिमहेश धौलाधार, पांगी व जांस्कर पर्वत श्रृंखलाओं से घिरा हुआ है। मणिमहेश को कैलाश पर्वत के नाम से भी जाना जाता है, प्राचीन काल से श्रद्धालु इस कैलाश की तीर्थ यात्रा करते आ रहे हैं। यहाँ पर एक झील है जो मणिमहेश झील या कैलाश कुंड के नाम से जाना जाता है। इस झील की उँचाई समुद्र तल से लगभग 13,500 फुट यानि 4110 मीटर की है, इस झील की पूर्व की दिशा बर्फ से ढका मणिमहेश पर्वत है इसकी चोटी समुद्र तल से लगभग 18,564 फुट ऊंचाई पर है।

मणिमहेश झील पर स्तिथ पूजा स्थल

Thursday, 23 February 2017

Manimahesh Yatra- Part 5 .Return Journey from Manimahesh

मणि महेश कैलाश यात्रा-5 ( मणिमहेश-हडसर- भरमौर- पठानकोट ) 

पिछले भाग से आगे ....
पथरीला रास्ता और घना जंगल; ऊपर से कृष्ण पक्ष की  काली रात। डर लगना स्वाभाविक था लेकिन मुझे अपने से आगे और पीछे ,दोनों जगह से, किसी के चलने और बोलने की आवाज आ रही थी- मतलब और यात्री भी आगे पीछे हैं। इसी बात का होंसला था। मैंने तेजी से चलकर आगे वाले ग्रुप के साथ होना चाहता था लेकिन वो भी तेज चल रहे थे । फिर भी थोड़ी देर में मैंने उनको पकड़ लिया और उनके साथ ही हो लिया । उनका साथ मिल जाने से भय निकल गया । वे तीन लड़के थे और तीनो पंजाब से बाइक पर आये थे । कल रात वे जाते हुए धन्छो में रुके थे और आज दर्शन के बाद वापिस लौट रहे थे । वे भी मेरी तरह बुरी तरह थके हुए थे।

Thursday, 16 February 2017

Manimahesh Yatra- Part 4 :Darshan of Holy Lake ,Kailash and Return Journey

मणि महेश कैलाश यात्रा-4 (मणिमहेश से वापसी )

पिछली पोस्ट में आपने पढ़ा की मैं लगभग 2:30 बजे मणिमहेश पहुँच गया था लेकिन भारी बारिश शुरू हो जाने से मैं झील से थोड़ा पहले बने एक कंक्रीट के निर्माण के नीचे सुरक्षित स्थान पर चला गया और वहाँ बैठने की जगह न होने के कारण खड़े खड़े ही बारिश रुकने का इंतजार करने लगा । एक ही जगह काफी देर स्थिर खड़े रहने से मुझे ठण्ड लगने लगी और हाथ सुन्न होने लगे।


Thursday, 9 February 2017

Mamnimahesh Yatra -Part 3 (Hadsar-Dhanchho-Gaurikund-Manimahesh



मणि महेश कैलाश यात्रा-3 (हडसर-धन्छो-गौरीकुंड-मणिमहेश) 
   
सुबह 5 बजे अलार्म की आवाज सुनकर उठा । अच्छी नींद के साथ ही सारी थकावट दूर हो चुकी थी । नहाने का काम तो रात को ही निपटा दिया था, बाकि काम 10 मिनट में निपटा कर मुंह हाथ धोया और तैयार हो गया । एक छोटा पिठू बैग ट्रैकिंग के लिए तैयार किया , जिसमे एक रेन कोट , एक टोर्च और हल्का खाने पीने  का सामान । इस समय यहाँ काफ़ी ठंडा थी इसलिए गर्म कपड़े मैंने पहन ही लिए थे । बाकी जो भी सामान बचा था उसे एक बैग में रखकर बैग उसी कमरे में रख दिया और सुबह 5:30 से पहले ही मैंने रूम छोड़ दिया और नीचे मुख्य सड़क पर आ गया ।

Saturday, 4 February 2017

Manimahesh Kailash Yatra- Part 2 -Pathankot-Chamba- Bharmour-Hadsar

मणि महेश कैलाश यात्रा-2

मणि महेश कैलाश यात्रा-2 ( पठानकोट-चम्बा-भरमौर–हडसर )

पठानकोट से चम्बा की दुरी लगभग 125  किलोमीटर है। लगभग पूरा रास्ता पहाड़ी है । बस में 160  रुपये की टिकेट लगी । टिकेट के पीछे दुरी 130  किलोमीटर लिखी थी । शायद बस का रूट कुछ अलग हो ,बाइपास वगैरह से । बस  धार कलां , भात्वान और बनीखेत होते हुए गयी । बनीखेत से ही दायें  तरफ डलहौजी की सडक कटती है । यहाँ से डलहौजी मात्र 8 किलोमीटर की दुरी पर है जबकि चम्बा 45 किलोमीटर दूर है । यहाँ तक खूब बारिश मिली, मौसम भी एकदम सुहावना बना हुआ था लेकिन मेरे लिए बस का सफ़र आरामदायक नहीं रहा , पुरे रास्ते खाली पेट होने से  और नींद के कारण परेशान रहा । पहाड़ी रास्ता होने के कारण जी अलग मिचलाने लगा । बैग में परांठे पैक किये हुए रखे थे लेकिन खाने की बिलकुल भी इच्छा नहीं थी । मालूम था अगर कुछ  भी खा लिया तो तुरंत मुंह से ही वापिस निकालना पड़ेगा । रास्ते में एक जगह चाय नाश्ते के लिए बस रुकी । यहाँ मैंने नीबूं सोडा ही लिया , इसके बाद मेरी तबियत में हल्का सा सुधार आया ।

हडसर से दिखता हिमालय