Thursday, 23 March 2017

BIKE TRIP- Chopta,Tungnath and Deoria Tal- 2nd Part

चोपता, तुंगनाथ, देवरिया ताल यात्रा-2 (देवप्रयाग से चोपता )
यात्रा तिथि -03 अक्टूबर 2015 

देवप्रयाग में जिस गेस्ट हाउस में हम ठहरे थे वो संगम के ठीक ऊपर काफी ऊंचाई पर बना हुआ है । रात को तो अँधेरा हो जाने के कारण हम यहाँ से संगम देख नहीं पाए थे। । सुबह उठकर जब बाहर निकल कर देखा वहीँ से संगम दिख रहा था। अलकनंदा और भागीरथी ,दोनों नदियों काफी शोर करते हुए बह रही थी । मंद मंद बहती शीतल हवा के बीच आसपास का नज़ारा बेहद हसीं लग रहा था ।

Friday, 17 March 2017

BIKE TRIP of Chopta-Tungnath-Devria Tal- Part 1

चोपता, तुंगनाथ, देवरिया ताल यात्रा-1

यात्रा तिथि -02 अक्टूबर 2015  से 05 अक्टूबर 2015 

      काफी समय से मेरी तुंगनाथ और देवरिया ताल जाने की इच्छा थी । वर्ष 2011 में जब केदारनाथ जी और बद्रीनाथ जी की यात्रा पर गया था तो केदारनाथ से बद्रीनाथ जाने के लिये, उखीमठ चोपता होते हुए गोपेश्वर -चमोली जाने वाली सड़क से होकर ही गया था ।तब से इस जगह की ख़ूबसूरती दिलो दिमाग में छाई हुई थी । उस समय मुझे तुंगनाथ के बारे में मालूम नहीं था लेकिन जगह की ख़ूबसूरती से इतने प्रभावित हुए थे कि उखीमठ से चमोली के 70 किलोमीटर के रास्ते में ही हम तीन- चार जगह पर रुके  थे । जब बाद में मालूम हुआ कि तुंगनाथ -देवरिया ताल भी इधर ही हैं तभी से यहाँ फ़िर से जाने की इच्छा मन में बनी हुई थी ।

देवप्रयाग

Wednesday, 1 March 2017

Manimahesh Yatra : Significance and Important Information of Yatra


 मणि महेश कैलाश यात्रा-1
मणि महेश कैलाश यात्रा-6 ( मणिमहेश महात्म्य कथा एवम अन्य जानकारी )

मणिमहेश पौराणिक महत्व :
देवभूमि  हिमाचल  का चंबा जिला शिवभूमि के नाम से विख्यात है। इस जिले में मणिमहेश़ ऐसा तीर्थ स्थल है जिसकी सदियों से जन-जन में मान्यता रही है। जम्मू के डोडा, भद्रवाह किश्तवाड़  क्षेत्रों  के लोग तो सैंकड़ो  मीलों का यह सफर नंगे पैर तय कर पवित्र झील में डुबकी लगाकर अपना जीवन धन्य मानते है । हिमाचल प्रदेश मे चम्बा जिले के भरमौर के एक पर्वत शिखर पर ब्रह्माणी देवी का तत्कालीन मंदिर है और यह मंदिर बुद्धिल घाटी में स्थित है। चम्बा जिले मे ही स्थित मणिमहेश- कैलाश भी बुद्धिल घाटी का ही एक भाग है। मणिमहेश धौलाधार, पांगी व जांस्कर पर्वत श्रृंखलाओं से घिरा हुआ है। मणिमहेश को कैलाश पर्वत के नाम से भी जाना जाता है, प्राचीन काल से श्रद्धालु इस कैलाश की तीर्थ यात्रा करते आ रहे हैं। यहाँ पर एक झील है जो मणिमहेश झील या कैलाश कुंड के नाम से जाना जाता है। इस झील की उँचाई समुद्र तल से लगभग 13,500 फुट यानि 4110 मीटर की है, इस झील की पूर्व की दिशा बर्फ से ढका मणिमहेश पर्वत है इसकी चोटी समुद्र तल से लगभग 18,564 फुट ऊंचाई पर है।

मणिमहेश झील पर स्तिथ पूजा स्थल

Thursday, 23 February 2017

Manimahesh Yatra- Part 5 .Return Journey from Manimahesh

मणि महेश कैलाश यात्रा-5 ( मणिमहेश-हडसर- भरमौर- पठानकोट ) 

पिछले भाग से आगे ....
पथरीला रास्ता और घना जंगल; ऊपर से कृष्ण पक्ष की  काली रात। डर लगना स्वाभाविक था लेकिन मुझे अपने से आगे और पीछे ,दोनों जगह से, किसी के चलने और बोलने की आवाज आ रही थी- मतलब और यात्री भी आगे पीछे हैं। इसी बात का होंसला था। मैंने तेजी से चलकर आगे वाले ग्रुप के साथ होना चाहता था लेकिन वो भी तेज चल रहे थे । फिर भी थोड़ी देर में मैंने उनको पकड़ लिया और उनके साथ ही हो लिया । उनका साथ मिल जाने से भय निकल गया । वे तीन लड़के थे और तीनो पंजाब से बाइक पर आये थे । कल रात वे जाते हुए धन्छो में रुके थे और आज दर्शन के बाद वापिस लौट रहे थे । वे भी मेरी तरह बुरी तरह थके हुए थे।

Thursday, 16 February 2017

Manimahesh Yatra- Part 4 :Darshan of Holy Lake ,Kailash and Return Journey

मणि महेश कैलाश यात्रा-4 (मणिमहेश से वापसी )

पिछली पोस्ट में आपने पढ़ा की मैं लगभग 2:30 बजे मणिमहेश पहुँच गया था लेकिन भारी बारिश शुरू हो जाने से मैं झील से थोड़ा पहले बने एक कंक्रीट के निर्माण के नीचे सुरक्षित स्थान पर चला गया और वहाँ बैठने की जगह न होने के कारण खड़े खड़े ही बारिश रुकने का इंतजार करने लगा । एक ही जगह काफी देर स्थिर खड़े रहने से मुझे ठण्ड लगने लगी और हाथ सुन्न होने लगे।


Thursday, 9 February 2017

Mamnimahesh Yatra -Part 3 (Hadsar-Dhanchho-Gaurikund-Manimahesh



मणि महेश कैलाश यात्रा-3 (हडसर-धन्छो-गौरीकुंड-मणिमहेश) 
   
सुबह 5 बजे अलार्म की आवाज सुनकर उठा । अच्छी नींद के साथ ही सारी थकावट दूर हो चुकी थी । नहाने का काम तो रात को ही निपटा दिया था, बाकि काम 10 मिनट में निपटा कर मुंह हाथ धोया और तैयार हो गया । एक छोटा पिठू बैग ट्रैकिंग के लिए तैयार किया , जिसमे एक रेन कोट , एक टोर्च और हल्का खाने पीने  का सामान । इस समय यहाँ काफ़ी ठंडा थी इसलिए गर्म कपड़े मैंने पहन ही लिए थे । बाकी जो भी सामान बचा था उसे एक बैग में रखकर बैग उसी कमरे में रख दिया और सुबह 5:30 से पहले ही मैंने रूम छोड़ दिया और नीचे मुख्य सड़क पर आ गया ।

Saturday, 4 February 2017

Manimahesh Kailash Yatra- Part 2 -Pathankot-Chamba- Bharmour-Hadsar

मणि महेश कैलाश यात्रा-2

मणि महेश कैलाश यात्रा-2 ( पठानकोट-चम्बा-भरमौर–हडसर )

पठानकोट से चम्बा की दुरी लगभग 125  किलोमीटर है। लगभग पूरा रास्ता पहाड़ी है । बस में 160  रुपये की टिकेट लगी । टिकेट के पीछे दुरी 130  किलोमीटर लिखी थी । शायद बस का रूट कुछ अलग हो ,बाइपास वगैरह से । बस  धार कलां , भात्वान और बनीखेत होते हुए गयी । बनीखेत से ही दायें  तरफ डलहौजी की सडक कटती है । यहाँ से डलहौजी मात्र 8 किलोमीटर की दुरी पर है जबकि चम्बा 45 किलोमीटर दूर है । यहाँ तक खूब बारिश मिली, मौसम भी एकदम सुहावना बना हुआ था लेकिन मेरे लिए बस का सफ़र आरामदायक नहीं रहा , पुरे रास्ते खाली पेट होने से  और नींद के कारण परेशान रहा । पहाड़ी रास्ता होने के कारण जी अलग मिचलाने लगा । बैग में परांठे पैक किये हुए रखे थे लेकिन खाने की बिलकुल भी इच्छा नहीं थी । मालूम था अगर कुछ  भी खा लिया तो तुरंत मुंह से ही वापिस निकालना पड़ेगा । रास्ते में एक जगह चाय नाश्ते के लिए बस रुकी । यहाँ मैंने नीबूं सोडा ही लिया , इसके बाद मेरी तबियत में हल्का सा सुधार आया ।

हडसर से दिखता हिमालय 

Tuesday, 31 January 2017

Manimahesh Kailash Yatra- Part 1

मणि महेश कैलाश यात्रा-1

यात्रा तिथि -14 अगस्त 2014  से 17 अगस्त 2014

 बहुत वर्षों से मणिमहेश जाने की इच्छा थी लेकिन संयोग ही नहीं बन रहा था । मणिमहेश की यात्रा अमरनाथ यात्रा के समाप्त होने के बाद शुरू होती है अब चूँकि मैं पिछले कुछ सालों से हर साल अमरनाथ यात्रा पर जाता हूँ तो वहां से आने के तुरंत बाद दूसरी नयी ट्रैकिंग पर जाने की हिम्मत ही नहीं होती थी । इसके अलावा छुट्टी की भी समस्या रहती थी , और सच कहूँ तो कभी जाने के गंभीर प्रयास भी नहीं किये । आधिकारिक रूप से मणिमहेश यात्रा जन्म अष्टमी से शुरू होकर राधा अष्टमी तक 15 दिनों के लिए चलती है । वैसे कुछ लोग यात्रा से पहले या बाद में भी जाते हैं लेकिन उन दिनों उन्हें अपने खाने पीने और ठहरने की व्यवस्था खुद ही करनी पड़ती है।

   

Friday, 27 January 2017

Madhyamaheshwar Yatra-Part 4 :Return journey from Madhyamaheshwar



मद्महेश्वर  यात्रा –चौथा भाग – मद्महेश्वर से वापसी  

मंदिर में दर्शनों और आरती से निपट कर एक बार पुजारी जी से मिलने गए और फिर आगे का विचार किया गया । एक विचार ये था की अभी चलकर रात 9 बजे तक खटरा चट्टी रुका जाये । दूसरा ये की यहाँ रुक कर सुबह जल्दी निकला जाये । पहले के लिए अधिक मत थे लेकिन डाक्टर साहिब की तबियत ठीक नहीं थी । अपने डाक्टर साहिब यानि त्यागी जी बहुत मधुर बोलतें हैं, यक़ीनन इनके कई मरीज तो इनकी आवाज सुन कर ही ठीक हो जाते होंगे और ये भी हो सकता है की बहुत से तो इनकी आवाज सुनने के लिए ही 'मरीज' बन कर इनके पास आते होंगे. यहाँ जब उन्होंने अपनी दर्द भरी मीठी आवाज में कहा की देखो भैया ,अब मैं बिलकुल भी चलने की स्थिति में नहीं हूँ ,मैं तो नहीं जा पाऊँगा तो तुरंत सर्वसम्मति से वहीँ रुकने का निर्णय ले लिया गया.  
मंदिर के बाहर ग्रुप की फ़ोटो

Wednesday, 18 January 2017

Madhyamaheshwar Yatra-Part 3 : Madhyamaheshwar,Burha Madhyamaheshwar and Chaukhamba

मद्महेश्वर(मध्यमेश्वर) यात्रा: पार्ट 3 :   

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पिछली पोस्ट में आपने पढ़ा की हम दोपहर के लगभग दो बजे मद्महेश्वर पहुँच गए थे । मंदिर से पहले रुकने ,खाने-पीने के लिए 4-5 दुकाने हैं। मंदिर के आस पास काफी खुला मैदान है । आज अच्छी धुप निकली हुई थी इसलिए कुछ देर तो सबने आराम किया । उस समय मंदिर के कपाट बंद थे। इतने में मंदिर के पुजारी भी अपने कमरे से बाहर आ गए और बोले यदि आपको अभी वापिस जाना हो तो मंदिर खुलवा देते हैं आप दर्शन कर लो । हमने उन्हें बताया की पहले हम बूढ़ा मद्महेश्वर जायेंगे वहाँ से आने के बाद मंदिर में दर्शन करेंगे । इसी बीच कृष्ण आर्य जी बड़ी हिम्मत वाले निकले और बर्फ़ीले पानी से नहाने लग गए, उन्हें लगा की हम पहले यहाँ दर्शन करेंगे । पानी बहुत ठंडा था , हाथ धोने मात्र से ही सुन्न हो रहे थे लेकिन आर्य जी बाल्टी भर पानी से नहा लिए । नहाने के बाद उन्होंने सिर्फ़ धोती कुरता पहना जिससे उन्हें ठण्ड लग  गयी और उन्होंने कहा की वो अब ऊपर बूढ़ा मद्महेश्वर नहीं जायेंगे बल्कि नीचे मंदिर के पास पुजारी जी के साथ ही रुकेंगे ।