Tuesday, 24 October 2017

Dharamshala - Mcleodganj

धर्मशाला - मैक्लोडगंज 

बैजनाथ मंदिर में पुनः दर्शन के बाद हम लोग नाश्ते की तलाश में मार्किट की तरफ़ गए लेकिन अभी तक यहाँ की मार्किट नही खुली थी इसलिए यहाँ से बिना नाश्ता किये ही धर्मशाला की तरफ चल दिये । धर्मशाला के लिए हमें पालमपुर होते हुए चामुंडा देवी तक जाना था जहाँ से धर्मशाला का रास्ता अलग हो जाता है । यानि कल रात हम जिस रास्ते से आये थे उसी रास्ते से हमें चामुंडा देवी तक वापिस जाकर  , वहां से कांगड़ा जाने वाले मार्ग को छोड़ कर धर्मशाला जाने वाली सड़क पर जाना था । बैजनाथ से चामुंडा देवी की दूरी 22 किलोमीटर है और सारा रास्ता पहाड़ी ही है। इस पूरे रास्ते मे धौलाधार के शानदार नज़ारे देखने को मिलते हैं । मशहूर हिल स्टेशन पालमपुर लगभग मध्य में पड़ता है। पालमपुर अपने चाय के बागानों के लिए मशहूर है । पालमपुर में हम सबने एक चाय के बागान से हरी पत्तियों की चाय खरीदी ।

Thursday, 12 October 2017

Baijnath Temple -Himachal Pardesh

बैजनाथ मंदिर- हिमाचल प्रदेश
माँ चामुंडा देवी के दर्शन के बाद मंदिर परिसर से बाहर आकर पहले सबने चाय पी । सुबह नाश्ते के बाद से हमने अभी तक चाय नही पी थी इसलिए चाय की तलब भी हो हो रही थी । चाय पीने के बाद पार्किंग से गाड़ी निकाल कर बैजनाथ की ओर चल दिए । अब तक साढ़े पांच बज चुके थे औऱ हल्का अंधेरा होने लगा था । चामुंडा से बैजनाथ तक सारा रास्ता पहाड़ी ही है और  मशहूर हिल स्टेशन पालमपुर से होकर जाता है । पालमपुर अपने चाय के बागानों के लिए मशहूर है । इस पूरे रास्ते मे धौलाधार के शानदार नज़ारे देखने को मिलते हैं । अब चूँकि अंधेरा हो चुका था इसलिए इस समय हम बर्फ़ीली चोटियाँ नही देख पा रहे थे ।


Friday, 29 September 2017

Mata Chintpurni

माता चिन्तपूर्णी मंदिर- छिन्नमस्तिका देवी

बगुलामुखी मंदिर में दर्शन के बाद हम सीधा माता चिंतपूर्णी के मंदिर की ओर चल दिये । माता चिंतपूर्णी का मंदिर यहाँ से लगभग 35 किलोमीटर दूर है ।यही रोड आगे मुबारकपुर ,अम्ब होते हुए ऊना  और नंगल की तरफ चली जाती है । बगुलामुखी से चिंतपूर्णी जाते हुए रास्ते में ब्यास नदी भी मिलती है लेकिन उस समय सर्दी होने के कारण ब्यास नदी में पानी काफी कम था । ब्यास नदी का पुल लगभग मध्य में पड़ता है यानि इस पुल से बगलामुखी और माता चिंतपूर्णी के मंदिर लगभग बराबर दुरी पर ही होंगे ।

मन्दिर का गर्भ गृह 

Wednesday, 27 September 2017

Mata Baglamukhi

माता बगलामुखी
माता चामुण्डा देवी के मंदिर में दर्शन के बाद हम लोग बैजनाथ चले गए । मंदिर में दर्शनों के बाद रात्रि विश्राम वहीँ एक होटल में किया । सुबह उठकर दोबारा मंदिर में दर्शन के लिए चले गए और फिर वहां से दोबारा चामुंडा होते हुए सीधा धर्मशाला और फिर मैकडोनल्ड गंज पहुँच गए । वहाँ पर प्रसिद्ध बौद्ध मंदिर गए। बाबा बैजनाथ और मैकडोनल्ड गंज पर बाद में लिखूंगा , अभी नवरात्रे में आपको माता के अलग अलग सिद्ध स्थानों पर लेकर चलूँगा । 

धर्मशाला से वापसी में सीधा माता चिंतपूर्णी वाली सड़क पर चल दिए । ज्वाला जी मंदिर से कुछ किलोमीटर पहले रानीताल के पास से एक तिराहा है । इस तिराहे से एक सड़क दायीं और जा रही है जो सीधा माता चिंतपूर्णी को चली जाती है, इस जगह से कुछ किलोमीटर आगे मुख्य सड़क पर ही माँ बगलामुखी का बड़ा प्रसिद्ध मंदिर है। पहाड़ी इलाका होने के कारण मंदिर सड़क से नीचे है । सड़क पर मुख्य द्वार है यहाँ से नीचे सीडियां उतर कर ही मंदिर में जाया जाता है ।
 

Tuesday, 26 September 2017

Mata Chamunda Devi

चामुंडा देवी मंदिर

बृजेश्वरी देवी, काँगड़ा में दर्शन के बाद हम चामुंडा देवी मंदिर की ओर चल दिए । काँगड़ा से चामुण्डा देवी का मंदिर लगभग 25 किलोमीटर दूर है । सड़क अच्छी बनी है ,ट्रैफिक भी कम था तो गाड़ी तेजी से भागी जा रही थी । काँगड़ा से आगे चलने पर धौलाधार पर्वत माला दिखनी शुरू हो गयी और इसकी बर्फ से ढकी ऊँची चोटियाँ काफी मनोरम दृश्य पैदा कर रही थी।, हरि भरी वादियाँ और कल कल बहते झरने हमें अपनी ओर आकर्षित कर रहे थे । बीच में दो या तीन जगह पठानकोट –जोगिन्दर नगर रेल मार्ग की छोटी लाइन भी मिलती है । कुल मिला कर इस यात्रा मार्ग में अनेंक मनमोहक दृश्य हैं , पहाडी सौन्दर्य का लुफ्त उठाते हुए हमें समय का मालूम ही नहीं चला और हम चामुण्डा देवी पहुंच गए ।

Monday, 25 September 2017

Mata Brijeshwari Devi -Kangra

माँ बृजेश्वरी देवी - नगरकोट वाली माता

ज्वाला जी में दर्शन के बाद हमने बिना समय गवाएं, जल्दी से पार्किंग से गाड़ी निकाली और काँगड़ा की तरफ़ चल दिए जहाँ हमने बृजेश्वरी देवी यानि काँगडे वाली माता के दर्शन करने थे । काँगड़ा यहाँ से ज्यादा दूर नहीं है, मात्र 35 किलोमीटर ही है। काँगड़ा तक सड़क भी अच्छी बनी है इसलिए हम लगभग एक घंटे से भी कम समय में वहां पहुँच गए। मंदिर के आसपास कहीं पार्किंग नज़र नहीं आई तो एक सामने ही एक गली में गाड़ी साइड में लगा दी, मतलब पचास रूपये बचा लिये। मंदिर जाने के लिये गलियों से गुज़र कर जाना पड़ता है । मुख्य सड़क से मंदिर दिखायी भी नहीं देता सिर्फ़ एक छोटा सा गेट बना है और सारा रास्ता तंग गलियों से होकर है । मंदिर तक पहुंचना एक भूल भुलैया जैसा ही है ।


Saturday, 23 September 2017

Maan Jwala ji

ज्वालामुखी देवी

नैना देवी मंदिर में दर्शन के बाद बाहर आकर पार्किंग की तरफ चल दिए और वहीँ एक भोजनालय में अमृतसर के मशहूर छोले कुलचे खाए और फिर चाय पीकर आगे के सफ़र के लिये निकल लिये । यहीं से एक सड़क सीधे भाखड़ा बांध होते हुए नंगल-उना की तरफ चली जाती है । जब यहाँ से चलने लगे तब  स्वर्ण ने कहा कि मुझे बाबा बालक नाथ के मंदिर जाना है वो इधर कहीं पास ही है , गूगल पर चेक किया तब मालूम हुआ की वो स्थान यहाँ से लगभग 100 किमी दूर है लेकिन जिस रास्ते से हमें जाना है उससे केवल 16 किमी हटकर है । हमने सर्वमत से सबसे पहले वहीँ चलने का फ़ैसला किया । वैसे तो इन दोनों स्थानों में एरियल दुरी 20 किमी ही होगी लेकिन बीच में गोविंग सागर झील पड़ने से इसके किनारे –किनारे घूम कर आने से बहुत दूर पड़ता है । यहाँ से हमने अपनी गाड़ी नंगल-उना वाली सड़क पर दौड़ा दी और भाखड़ा बांध के आगे से होते हुए उना-हमीरपुर रोड पर पहुँच गए । इसी मार्ग पर बडसर नमक जगह से बाबा बालक नाथ के मंदिर का रास्ता अलग हो जाता है। इस जगह से मंदिर 16 किमी दूर है। इस यात्रा का जिक्र कभी बाद में करेंगे आज सिर्फ़ ज्वाला माता के मंदिर ही चलते हैं ।

माँ ज्वाला जी मंदिर

Friday, 22 September 2017

Maa Naina Devi

नैना देवी मंदिर
हिमाचल में पाँच देवियों की यात्रा , एक काफी प्रसिद्ध यात्रा सर्किट है । माँ नैना देवी से शुरू होकर ,माँ चिंतपूर्णी ,माँ ज्वाला जी, कांगडे वाली माता (बृजेश्वरी देवी) और माता चामुण्डा देवी । बहुत से टूर ओपेरटर भी इन देवियों के एक साथ दर्शन के लिये बस द्वारा यात्रा आयोजित करते रहते हैं। अम्बाला से तीन दिन में इन सभी स्थानों पर जाकर वापिस आया जा सकता है।

Thursday, 21 September 2017

Mansa Devi Yatra -Panchkula

माता मनसा देवी मंदिर ,पंचकुला

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके  शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते 

शिवालिक पर्वत माला की गोद में बसी माता मनसा देवी पर जाने का मुझे कई बार सौभाग्य मिला है । यहाँ परिवार के साथ ,दोस्तों के साथ और अकेले भी कई बार जा चूका हूँ । आज से 16 -17 वर्ष पहले मैं चंडीगढ़ में प्राइवेट जॉब करता था तो जब भी काम से जल्दी फ्री हो जाते तो शाम को अम्बाला की ट्रेन पकड़ने से पहले कई बार जल्दी से माता मनसा देवी के मंदिर में चले जाते थे । इस मंदिर की दूर दूर तक काफी मान्यता है और रविवार के दिन तो यहाँ काफी भीड़ हो जाती है ।

माता मनसा देवी 

Monday, 11 September 2017

Kedarnath Jyotirling Yatra-2011

 केदारनाथ यात्रा- 2011

मैं आज आपको अपने साथ भोले नाथ के धाम केदारनाथ लेकर चलूँगा । केदारनाथ - भोले बाबा के 12 ज्योतिर्लिंगों में से ग्यारवें क्रमांक पर है लेकिन यात्रा में सबसे कठिन है । जहाँ बाकि सभी ज्योतिर्लिंग मैदानी इलाकों में हैं और यहाँ केदारनाथ में 14 किलोमीटर की ख़तरनाक चढ़ायी . (2013 की आपदा के बाद ये अब 2-3 किमी और बढ़ गयी है ). मैंने 12 ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने का सिलसिला सबसे पहले सबसे कठिन से ही शुरू करने का फ़ैसला लिया .

जून-2011 में केदारनाथ ,बद्रीनाथ और हेमकुंड साहिब की यात्रा के लिये  एक तवेरा गाड़ी 1 +8 सिटर बुक कर ली । हमने जून का महीना इसलिए चुना था क्योकि इन दिनों पहाडॊं में बारिश की संभावना बहुत कम होती है और भूस्खलन का खतरा भी ।