Thursday, 20 July 2017

Amarnath Yatra : Jammu to Pahalgam Base Camp

पहला भाग पढ़ने के लिये यहाँ क्लिक करें

हमने इस यात्रा के लिए अम्बाला से ही एक टवेरा बुक कर ली थी । हम कुल छह लोग थे । मेरे साथ मेरा भतीजा चिरंजीव @चन्दन ,एक मेरे सहकर्मी सुखविन्दर , तीन मेरे दोस्त शुशील मल्होत्रा ,स्वर्ण और देवेंद्र थे। इनमे से चन्दन और सुखविन्दर की यह पहली यात्रा थी , बाकि सब लोग पहले भी कई बार जा चुके थे । तय दिन हमें अम्बाला से निकलते -निकलते सुबह के 9 बज गए । सारा सामान छत पर बांध कर हम लोग यात्रा के लिए रवाना हो गए । पहला विश्राम जालंधर में लिया जो अम्बाला से लगभग 200 किलोमीटर है । वहां शुशील के मामा जी की छोले भटूरे की दुकान है । हम जब भी गाड़ी से जाएँ तो यहाँ जरूर रुकते हैं । यहाँ रूककर सबने छोले भटूरे और छोले चावल खाये । खाना खाने के बाद सबने चाय पी फिर उनसे विदा लेकर आगे की यात्रा जारी रखी । यहाँ हमें लगभग एक घंटा लग गया ।


Friday, 14 July 2017

Amarnath Yatra - General information and instructions for the Yatra

अमरनाथ यात्रा

वैसे तो मैं पहले भी दो बार अपने ब्लॉग पर अमरनाथ यात्रा के बारे में लिख चूका हूँ –पहली बालताल रूट से ,दूसरी बार पहलगाम रूट से ,लेकिन दोनों बार इस अंग्रेजी में ही लिखा। बहुत से मित्रों की ख़वाहिश है की मैं इसे एक बार फिर से लेकिन हिंदी मैं लिखूं । इसलिये फिर से अमरनाथ यात्रा को लेकर हाज़िर हूँ । इस वर्ष भी ,अभी एक सप्ताह पहले ही बालताल रूट से अमरनाथ यात्रा करके आया हूँ लेकिन मेरे इस लेख का आधार पिछली बार की गयी यात्रा रहेगी जिसमे दोनों रूट कवर हुए थे यानि हमने पहलगाम से शुरू कर बालताल पर समाप्त किया था। यात्रा विवरण से पहले मैं इस यात्रा के बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी साँझा करना चाहूँगा ।

अमरनाथ गुफ़ा  

Sunday, 14 May 2017

वो सुबह कभी न आएगी


अभी तक मैंने यात्रा वृतांत ही लिखे हैं लेकिन आज कुछ हटकर लिख रहा हूँ । अपनी माँ के साथ बिताये पलों और ख़ासकर माँ के साथ बिताये अंतिम क्षणों को लेखनी की सहायता से कहना चाह रहा हूँ।

माँ भगवान से भी बढ़कर है क्यूंकि भगवान तो हमारे नसीब में सुख और दुख दोनो देकर भेजते हैं, लेकिन  हमारी माँ हमें सिर्फ़ और सिर्फ़ सुख ही देना चाहती है। माँ त्याग, बलिदान, क्षमा, धैर्य, ममता की प्रतिमूर्ति होती है । वैसे तो नारी के कई रूप हैं जैसे माँ, बहन, बेटी, बहु एवं सास लेकिन माँ का रूप ही सबसे बड़ा माना जाता है । ये बातें तो सभी जानते हैं और बहुत से मानते भी हैं तो मैं सीधा अपनी बात पर आता हूँ ।

मई 2010: माँ पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ चल रही थी । हार्ट की प्रॉब्लम थी । डाक्टरों के अनुसार दिल के एक वाल्व में जन्म से ही छेद था । पहले समस्या कम थी ,कभी कभी परेशानी होती थी , दवाई लेने से ठीक हो जाती थी लेकिन जैसे जैसे उम्र बढ़ती गयी बीमारी भी बढती गयी । दवाई और परहेज दिनचर्या का हिस्सा बन गये । एक बार हार्ट अटैक भी आया ,तबियत ज्यादा ख़राब हुई तो माँ एक सप्ताह हस्पताल में दाखिल भी रही। अब डाक्टर ऑपरेशन के लिये कहने लगे लेकिन माँ ऑपरेशन के नाम से ही डरती थी । एकदम मना कर देती। हमारे कहने-समझाने पर भी न मानती ।

Tuesday, 18 April 2017

BIKE TRIP: Chopta-Tungnath-Deoria Tal :Part 5

चोपता, तुंगनाथ, देवरिया ताल यात्रा- 5

यात्रा तिथि -04/05 अक्टूबर 2015

पिछली पोस्ट में आपने पढ़ा की हम लोग सुबह 9 बजे देवरिया ताल के लिये चले थे और लगभग दोपहर 12:30 बजे सारी गाँव वापिस आ गए । सारी गाँव पहुंचकर हमने अपनी अपनी बाइक उठाई, सामान लिया और उखीमठ की तरह चल दिए । मस्तुरा गाँव के पास एक दुकान पर रुककर चाय पी। चोपता जाते हुए भी इसी दुकान पर रुके थे। थोड़ा ब्रेक लेने के बाद फिर से उखीमठ की तरफ हमारी बाइक भागने लगी । सारा रास्ता तीखी ढलान वाला है तो बिना स्टार्ट करे ही बाइक सरपट भाग रही थी । उखीमठ से आगे कुंड तक ऐसे ही चला ।वहां आकर उतराई ख़तम हो जाती है और लगभग प्लेन रास्ता आ जाता है । कुंड से थोड़ा पहले ही बाइक फ़िर से स्टार्ट कर ली।

रुद्रप्रयाग -अलकनंदा तथा मंदाकिनी नदियों का संगमस्थल

Friday, 7 April 2017

BIKE TRIP: Chopta-Tungnath-Deoria Tal :Part 4 (Deoria Tal )

चोपता, तुंगनाथ, देवरिया ताल यात्रा-4 ( देवरिया ताल )
यात्रा तिथि -04 अक्टूबर 2015

अगली सुबह जल्दी ही मेरी आँख खुल गयी । समय देखा अभी 6 भी नहीं बजे थे । मैं जब भी घर से बाहर होता हूँ मेरी नींद हमेशा जल्दी खुल जाती है । साथी अभी सो रहा था और मैं उठकर बाहर आ गया । बाहर अभी हल्का अँधेरा था, थोड़ी देर कमरे के बाहर टहलता रहा । बाहर काफी ठण्ड थी । अन्दर कमरे में आया और जैकेट पहन कर ऊपर सड़क पर आ गया । अभी ढाबे भी बंद थे ,थोड़ी दूर सड़क पर टहलने निकल गया । कई खूबसूरत नज़ारे देखने को मिले । मोनाल (उत्तराखंड का राजकीय पक्षी ) और कई अन्य दुसरे खूबसूरत पक्षी आसपास  दिखे, पर अफ़सोस मेरे पास न कैमरा था न फ़ोन । कोई फोटो न खींच पाया ।

Saturday, 1 April 2017

BIKE TRIP -Chopta Tungnath -Deoria Tal- 3rd Part (Tungnath )


चोपता, तुंगनाथ, देवरिया ताल यात्रा-3 (चोपता तुंगनाथ –चोपता )
यात्रा तिथि -03 अक्टूबर 2015

चोपता पंहुच कर एक ढाबे वाले से कमरा पता किया । ढाबे के नीचे की तरफ 2 कमरे बने थे और अभी दोनों खाली थे । एक कमरा हमने 400 रूपये में ले लिया । ढाबे वाले ने बताया कि कल यहाँ बहुत भीड़ थी और रहने के लिए जगह कम पड़ गयी थी और किराया भी डबल था । खैर हम अपना सामान कमरे में रखकर बिना देर किये तुंगनाथ की और चल दिए । हमें चंद्रशिला भी जाना था तो इसलिए फ़िलहाल आराम करने का विचार त्याग दिया ।

सुन्दर बुग्याल

Thursday, 23 March 2017

BIKE TRIP- Chopta,Tungnath and Deoria Tal- 2nd Part

चोपता, तुंगनाथ, देवरिया ताल यात्रा-2 (देवप्रयाग से चोपता )
यात्रा तिथि -03 अक्टूबर 2015 

देवप्रयाग में जिस गेस्ट हाउस में हम ठहरे थे वो संगम के ठीक ऊपर काफी ऊंचाई पर बना हुआ है । रात को तो अँधेरा हो जाने के कारण हम यहाँ से संगम देख नहीं पाए थे। । सुबह उठकर जब बाहर निकल कर देखा वहीँ से संगम दिख रहा था। अलकनंदा और भागीरथी ,दोनों नदियों काफी शोर करते हुए बह रही थी । मंद मंद बहती शीतल हवा के बीच आसपास का नज़ारा बेहद हसीं लग रहा था ।

Friday, 17 March 2017

BIKE TRIP of Chopta-Tungnath-Devria Tal- Part 1

चोपता, तुंगनाथ, देवरिया ताल यात्रा-1

यात्रा तिथि -02 अक्टूबर 2015  से 05 अक्टूबर 2015 

      काफी समय से मेरी तुंगनाथ और देवरिया ताल जाने की इच्छा थी । वर्ष 2011 में जब केदारनाथ जी और बद्रीनाथ जी की यात्रा पर गया था तो केदारनाथ से बद्रीनाथ जाने के लिये, उखीमठ चोपता होते हुए गोपेश्वर -चमोली जाने वाली सड़क से होकर ही गया था ।तब से इस जगह की ख़ूबसूरती दिलो दिमाग में छाई हुई थी । उस समय मुझे तुंगनाथ के बारे में मालूम नहीं था लेकिन जगह की ख़ूबसूरती से इतने प्रभावित हुए थे कि उखीमठ से चमोली के 70 किलोमीटर के रास्ते में ही हम तीन- चार जगह पर रुके  थे । जब बाद में मालूम हुआ कि तुंगनाथ -देवरिया ताल भी इधर ही हैं तभी से यहाँ फ़िर से जाने की इच्छा मन में बनी हुई थी ।

देवप्रयाग

Wednesday, 1 March 2017

Manimahesh Yatra : Significance and Important Information of Yatra


 मणि महेश कैलाश यात्रा-1
मणि महेश कैलाश यात्रा-6 ( मणिमहेश महात्म्य कथा एवम अन्य जानकारी )

मणिमहेश पौराणिक महत्व :
देवभूमि  हिमाचल  का चंबा जिला शिवभूमि के नाम से विख्यात है। इस जिले में मणिमहेश़ ऐसा तीर्थ स्थल है जिसकी सदियों से जन-जन में मान्यता रही है। जम्मू के डोडा, भद्रवाह किश्तवाड़  क्षेत्रों  के लोग तो सैंकड़ो  मीलों का यह सफर नंगे पैर तय कर पवित्र झील में डुबकी लगाकर अपना जीवन धन्य मानते है । हिमाचल प्रदेश मे चम्बा जिले के भरमौर के एक पर्वत शिखर पर ब्रह्माणी देवी का तत्कालीन मंदिर है और यह मंदिर बुद्धिल घाटी में स्थित है। चम्बा जिले मे ही स्थित मणिमहेश- कैलाश भी बुद्धिल घाटी का ही एक भाग है। मणिमहेश धौलाधार, पांगी व जांस्कर पर्वत श्रृंखलाओं से घिरा हुआ है। मणिमहेश को कैलाश पर्वत के नाम से भी जाना जाता है, प्राचीन काल से श्रद्धालु इस कैलाश की तीर्थ यात्रा करते आ रहे हैं। यहाँ पर एक झील है जो मणिमहेश झील या कैलाश कुंड के नाम से जाना जाता है। इस झील की उँचाई समुद्र तल से लगभग 13,500 फुट यानि 4110 मीटर की है, इस झील की पूर्व की दिशा बर्फ से ढका मणिमहेश पर्वत है इसकी चोटी समुद्र तल से लगभग 18,564 फुट ऊंचाई पर है।

मणिमहेश झील पर स्तिथ पूजा स्थल

Thursday, 23 February 2017

Manimahesh Yatra- Part 5 .Return Journey from Manimahesh

मणि महेश कैलाश यात्रा-5 ( मणिमहेश-हडसर- भरमौर- पठानकोट ) 

पिछले भाग से आगे ....
पथरीला रास्ता और घना जंगल; ऊपर से कृष्ण पक्ष की  काली रात। डर लगना स्वाभाविक था लेकिन मुझे अपने से आगे और पीछे ,दोनों जगह से, किसी के चलने और बोलने की आवाज आ रही थी- मतलब और यात्री भी आगे पीछे हैं। इसी बात का होंसला था। मैंने तेजी से चलकर आगे वाले ग्रुप के साथ होना चाहता था लेकिन वो भी तेज चल रहे थे । फिर भी थोड़ी देर में मैंने उनको पकड़ लिया और उनके साथ ही हो लिया । उनका साथ मिल जाने से भय निकल गया । वे तीन लड़के थे और तीनो पंजाब से बाइक पर आये थे । कल रात वे जाते हुए धन्छो में रुके थे और आज दर्शन के बाद वापिस लौट रहे थे । वे भी मेरी तरह बुरी तरह थके हुए थे।